पुरुषोत्तम मास

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जग में गुरु समान नहीं दाता

जग में गुरु समान नहीं दाता

गुरुदेव

गुरुदेव

गुरुरुपी माँ

गुरुरुपी माँ

गुरूभक्तियोग

गुरूभक्तियोग

अर्थात् जहाँ नारी की पूजा होती है, जहाँ उसे सम्मान मिलता है, वहाँ देवताओं का वास होता है ।
नारी वास्तव में शक्ति का ही स्वरूप है । यदि वह अपनी महिमा को जान ले तो पापात्मा को भी सज्जन बना सकती है और इसके विपरीत यदि वह चरित्रवती न हो तो

हे भारत की देवियो ! याद करो अपने अतीत की महान नारियों को... तुम्हारा जन्म भी उसी भूमि पर हुआ है, जिस पुण्यभूमि भारत पर सुलभा, गार्गी, मदालसा, शबरी, मीरा, जनाबाई, माँ आनंदमयी, जीजाबाई जैसी नारियों ने जन्म लिया था ।

अनेक विघ्न-बाधाएँ भी उनकी भक्ति एवं निष्ठा को न डिगा पायी थीं। तुममें भी अद्भुत सामर्थ्य छुपा हुआ है । अपने जीवन को भगवान की आराधना-उपासना, जप-तप- साधना में लगाओ तो तुम भी आत्मपद में आरूढ़ हो सकती हो ।

नारी ! तू नारायणी है । देवी ! पतन की ओर ले जानेवाली संस्कृति का अनुसरण करने की अपेक्षा अपनी संस्कृति को अपनाओ, संयम-साधना द्वारा अपने आत्मस्वरूप को पहचानो । ताकि तुम्हारा जीवन तो समुन्नत हो ही, तुम्हारी संतान भी सर्वांगीण प्रगति कर सके और भारत पुनः विश्वगुरु की पदवी पर आसीन हो सके...." - पूज्य संत श्री आशारामजी बापू

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सेवा की इतनी महिमा है कि सेवा करते-करते सेवक स्वयं स्वामी बन जाता है ।
- पूज्य बापूजी

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