यत्र नार्यस्तु पूजयन्ते रमन्ते तत्र देवताः ।

अर्थात् जहाँ नारी की पूजा होती है, जहाँ उसे सम्मान मिलता है, वहाँ देवताओं का वास होता है ।

नारी वास्तव में शक्ति का ही स्वरूप है । यदि वह अपनी महिमा को जान ले तो पापात्मा को भी सज्जन बना सकती है और इसके विपरीत यदि वह चरित्रवती न हो तो सज्जनों के पतन का कारण भी बन जाती है । इसलिए नारी में दैवी सम्पदा के सद्गुणों का होना आवश्यक है ।

देश तथा समाज की उन्नति के लिए भी नारी का सद्गुण एवं सुसंस्कार संपन्न होना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि भावी पीढ़ी की जननी वही है । नारी-समाज को पुनः अपनी महिमा से अवगत कराने, सर्वांगीण विकास हेतु उसका मार्गदर्शन करने तथा मनुष्य-जीवन के वास्तविक लक्ष्य भगवत्प्राप्ति के लिए सजग करने के लिए विश्ववंदनीय ब्रह्मनिष्ठ पूज्य संत श्री आशारामजी बापू की पावन प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में महिला उत्थान मंडल का गठन किया गया है ।

महिला उत्थान मंडल की स्थापना 15 जुलाई 2010 को पूज्य संत श्री आशारामजी बापू के शुभ आशीर्वाद से हुई । कई ऐसी महिलाएँ, युवतियाँ और बालिकाएँ हैं जो पूज्य बापूजी के सत्संग-मार्गदर्शन में अपना जीवन उन्नत बना रही हैं । उन्हें कई दिव्य अनुभव हुए हैं तथा उनके जीवन में कई आश्चर्यजनक परिवर्तन भी आये हैं ।