महिला उत्थान मंडल- एक परिचय

'महिला उत्थान मंडल' के नियम –

  1. पूज्य बापूजी से मंत्र दीक्षित सभी बहनें स्वतः ही महिला उत्थान मंडल की सदस्य हैं ।
  2. पूज्य बापूजी से मंत्र दीक्षा बहनों द्वारा 'महिला उत्थान मंडल' का संचालन होगा ।
  3. महिला उत्थान मंडल का गठन करते समय सेवायें प्रदान करने हेतू कुछ बहनोंको चयनीत कर उनकी योग्यता अनुसार निम्न पदों का कार्यभार उन्हें सौपें । अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष, मीडिया प्रभारी ।
  4. महिला उत्थान मंडल के सभी सदस्याओं का यह नैतिक कर्तव्य है कि अपने क्षेत्र के स्थानीय आश्रम व श्री योग वेदांत सेवा समिती को मजबूत बतायें और अन्य सेवा विभागों (ऋषि प्रसाद, युवा सेवा संघ व बाल संस्कार आदि) के साथ आपस में सामंजस्य रखते हुए पूज्य श्री के दैवी कार्यों को तीव्र गति से आगे बढ़ायें ।
  5. महिला उत्थान मंडल द्वारा समय-समय पर आयोजित होनेवाले 'चलें स्व की ओर...'  शिविरों का अधिक-से-अधिक महिलाओं को लाभ मिले, इस हेतू 'महिला उत्थान मंडल' की प्रत्येक सदस्या तैयार रहे ।

'महिला उत्थान मंडल' सदस्या हेतु नियम -

  1. महिला उत्थान मंडल से  जुड़ने पर महिलायें अपने चरित्र समाज में एक आदर्श नारी की तरह स्थापित करें ताकि वे व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक उत्थान का अपना दायित्व निभा सकें ।
  2. नारी ! तू नारायणी... दिव्य शिशु संस्कार, माँ तू कितनी महान है, संत माता माँ महंगीबा के मधुर संस्मरण, जीवन विकास, तुलसी रहस्य, जीवन रसायन, नारायण स्तुति का बार-बार तथा 'दिव्य प्रेरणा प्रकाश' सत्साहित्य का पाँच बार पठन करना अनिवार्य है ।
  3. पूज्य श्री के सानिध्य में होनेवाले 'ध्यान योग शिविर' का लाभ लेना अनिवार्य है।
  4. महिला उत्थान मंडल की सेवा-प्रणाली में दिये गए सेवाकार्यों को सुचारू रूप से चलायें । कोई भी सेवाकार्य करने से पूर्व स्थानीय समिति या आश्रम को सूचना देकर उनसे विचार विमर्श अवश्य करें ।
  5. सेवाकार्य के दौरान 'महिला उत्थान मंडल' की बहनें संयम का परिचय दें व सेवाधारी भाइयों के साथ सामाजिक दृष्टि से मर्यादित संपर्क रखें ।
  6. 'महिला उत्थान मंडल' की प्रत्येक सदस्या समाज के लिए उपयोगी, उद्योगी और सहयोगी बनकर रहे । यह पूज्यश्री का सिद्धांत है । इससे दूसरों के साथ स्वयं का भी सर्वोत्तम विकास निश्चित है।