Banner

महिला उत्थान मंडल- एक परिचय

समाजोत्थान की इस प्रक्रिया के सम्पादन हेतु महिला उत्थान मंडल द्वारा संचालित सेवा-प्रकल्प इस प्रकार हैं -

संस्कार सभाएँ : 8 या 15 दिन के अंतराल में बहनों का स्नेह-साधना मिलन । जिसमें सभी बहनें निश्चित स्थान पर एकत्रित हों । इस सभा में सामूहिक जप, ध्यान, संकल्प, अनुभव चर्चा व आगामी सेवा कार्यों के विषय में विचार-विमर्श करें ।

चलें स्व की ओर...शिविरकार्यक्रम - इसके अंतर्गत समय-समय पर देश के विभिन्न स्थानों पर आयोजित होनेवाले एक या तीन दिन दिवसीय शिविरों व सात दिवसीय जप अनुष्ठान शिविरों का आयोजन होता है । इस आयोजन का उद्देश्य जप, ध्यान, प्राणायाम आदि के द्वारा भीतर की सुषुप्त शक्तियों को जागृत करना है ।

दिव्य शिशु संस्कार अभियान - इस अभियान के द्वारा तेजस्वी व दिव्य संतान प्राप्ति की इच्छुक महिलाओं को शास्त्रोक्त उचित मार्गदर्शन दिया जाता है । इसी प्रयास को सफल बनाने की दिशा में दिव्य शिशु संस्कार केन्द्रों की शुरुआत भी की गयी है ताकि गर्भ से ही शिशु में संस्कार सिंचन की प्रक्रिया का प्रारम्भ हो सके । इस अभियान का उद्देश्य है कि धरती पर दिव्य आत्माओं का प्राकट्य हो और भारत पुनः विश्वगुरु के पद पर आसीन हो ।

गर्भपात व सिजेरियन डिलीवरी रोको अभियान - महिला उत्थान मंडल द्वारा गर्भपात व सिजेरियन डिलेवरी को रोकने के लिए विभिन्न प्रयास किये जाते हैं, शिविरों के माध्यम से अनुभवी डॉक्टरों तथा विशेषज्ञों द्वारा गर्भपात से होनेवाली हानियों तथा उससे बचने के उपायों की जानकारी दी जाती है । गर्भपात व सिजेरियन डिलीवरी से सावधान के पैम्फ्लेट्स व फ्लैक्स आदि जनसेवा में बाँटकर गर्भपात न कराने का संकल्प भी करवाया जाता है ।

तेजस्विनी अभियान - विद्यालय व महाविद्यालय की युवतियों को तेज, ओज, संयम की शिक्षा देने के उद्देश्य से सेमीनार्स का आयोजन किया जाता है ।

कैदी उत्थान कार्यक्रम - कैदी भाई-बहनों की मंगल कामना के शुभ भाव से महिला उत्थान मंडल की बहनें कई वर्षों से देशभर की विभिन्न जेलों में जाकर रक्षाबंधन पर्व के निमित्त रक्षासूत्र बाँधती हैं । भगवन्नाम कीर्तन करवाके मिठाई, सत्साहित्य आदि भेंट देती हैं ।

रक्षाबंधन कार्यक्रम - परम पूज्य बापूजी की प्रेरणा से वैदिक रक्षासूत्र के इसी सामर्थ्य का सदुपयोग देशसेवा में हो तथा देश की रक्षा में समर्पित सुरक्षा-प्रहरीयों (इ.ड.ऋ.,उ.ठ.झ.ऋ.,अठचध) का मनोबल बढ़े, उनका शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक विकास हो, उनकी रक्षा हो इसी शुभभाव से वैदिक रक्षासूत्र बाँधकर उनकी सुरक्षा की मंगलकामना की जाती है । इसके साथ ही देश के गणमान्य महानुभावों व विभिन्न क्षेत्रों के उच्च पदाधिकारियों को भी रक्षासूत्र बाँधा जाता है ।

संस्कृति रक्षा अभियान - 8 मार्च विश्व महिला दिवस के उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष इस अभियान के अंतर्गत संस्कृति व संतों के सम्मान रक्षा को लक्ष्य करके अलग-अलग विषयों पर ज्ञापन, रैली, धरना आदि का आयोजन किया जाता है ।

वृंदा (घर-घर तुलसी लगाओ अभियान) - कार्तिक मास में घर-घर जाकर महिला उत्थान मंडल की बहनें तुलसी माता की महिमा से समाज को अवगत कराने के उद्देश्य से तुलसी के पौधे व तुलसी महिमा पैम्फ्लेट का वितरण करती हैं ।

आध्यात्मिक जागरण अभियान - गली-गली में आध्यात्मिकता का शंखनाद करने के उद्देश्य से मंडल की बहनें घर-घर जाकर भजन-कीर्तन, श्री आशारामायण जी के पाठ का आयोजन करती हैं ।

नर सेवा नारायण सेवा - पूज्य संत श्री आशारामजी बापू का उद्घोष है कि सबका मंगल सबका भला हो इसलिए पूज्य बापूजी की पावन प्रेरणा से देशभर में महिला उत्थान मंडल द्वारा अमावस्या के दिन व उत्तरायण, अक्षय तृतीया, दीपावली, पूज्यश्री के अवतरण दिवस - साक्षात्कार दिवस जैसे अनेक मांगलिक पर पर्वों पर दरिद्नारायणों के बीच जीवनोपयोगी सामग्रियों व खाद्य पदार्थों का वितरण किया जाता है । आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राशन कार्ड बनाकर प्रति मासिक राशन दिया जाता है । ग्रीष्मकाल में शीतल पालश शरबत एवं छाछ वितरण भी किया जाता है ।