‘वेलेन्टाईन डे’ नहीं, ‘मातृ-पितृ’ पूजन दिवस मनायें

‘वेलेन्टाईन डे’ नहीं, ‘मातृ-पितृ’ पूजन दिवस मनायें


         ‘वेलेन्टाईन डे’ मनाना बहुत हानिकारक है । ‘वेलेन्टाईन डे’ क्यों मनाना ! गणेशजी जैसा ‘मातृ-पितृ पूजन’ दिवस मनाओ । गणपतिजी ने शिव-पार्वतीजी का पूजन किया और शिव-पार्वतीजी ने उनको गले लगाया और आशिर्वाद दिया : ‘बेटा ! तू उम्र में तो कार्तिक से छोटा है लेकिन तेरी समझ अच्छी है, तेरा पूजन पहले होगा ।’ इस दिन बच्चे-बच्चियाँ माता-पिता का आदर-पूजन करें और उनके सिर पर पुष्प रखें, प्रणाम करें तथा माता-पिता अपनी संतान को प्रेम करें । संतान अपने माता-पिता के गले लगे । इससे वास्तविक प्रेम का विकास होगा । बेटे-बेटियाँ माता-पिता में ईश्वरीय अंश देखें और माता-पिता में ईश्वरीय अंश जगायें । ऊँ...ऊँ... अमर आत्मा का सामर्थ्य जगायें ।

          बच्चे इस प्रकार माँ-बाप का पूजन करेंगे तो माँ-बाप का दिल खिलेगा, उनकी दुआएँ मिलेंगी, बहुत भला होगा । युवक-युवती मिलेंगे तो विनाश-दिवस बनेगा । ‘वेलेन्टाईन डे’ नहीं मनाना, क्या लव-लव करते हैं ! ये तो काम-विकार को ‘लव’ कहते हैं, छी...! प्रेम तो निर्दोष होता है, प्रेम तो अल्लाह से, परमात्मा से मिलाता है । परम सुख, परम चेतना का नाम है ‘प्रेम’ । सच्चे प्रेमस्वभाव से केवल भारतवासियों का ही नहीं, विश्वमानव का कल्याण होगा ।

          प्रेम में और काम में बहुत फर्क है । काम कमजोर करता है और निर्दोष प्रेम बलवान बनाता है । प्रेम में भगवान की कृपा होती है और काम में विकारों की उत्तेजना होती है । काम जड़ शरीर में, हाड़-मांस में ले आयेगा और प्रेम चैतन्य परमात्मा में ले आयेगा । यह प्रेम-दिन नहीं, ‘युवाधन विनाश डे’ है । उन अनजानों को नहीं पता है लेकिन डॉक्टर, वैद्य और बुद्धिमान समझ सकते हैं कि युवक-युवतियाँ एक-दूसरे को फूल देंगे, एक-दूसरे के शरीर को स्पर्श करेंगे तो सेक्सुअल केन्द्र की ऊर्जा नष्ट होगी या ऊर्ध्वगमन करेगी ?

          माता-पिता का पूजन करते हैं तो काम राम में बदलेगा, अहंकार प्रेम में बदलेगा, माता-पिता के आशीर्वाद से बच्चों का मंगल होगा । जो बच्चे अपने माता-पिता का आदर-सम्मान नहीं करते, वे जीवन में अपने लक्ष्य को कभी प्राप्त नहीं कर सकते । इसके विपरीत जो बच्चे अपने माता-पिता का आदर करते हैं, वे ही जीवन में महान बनते हैं और माता-पिता व देश का नाम रोशन करते हैं । माता-पिता व गुरुजनों की सेवा करनेवाला और उनका आदर करनेवाला स्वयं चिरआदरणीय बन जाता है ।

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