EasyDNNNews

Healthy Kitchen Viewer

जानिये कैसे बढ़ सकती है भोजन से दिव्यता ?
Visit Author's Profile: Admin

जानिये कैसे बढ़ सकती है भोजन से दिव्यता ?



आहार के लिए यह ज्ञान अत्यावश्यक है कि क्या खायें, कब खायें , कैसे खायें और क्यों खायें ?  इन चारों प्रश्नों के उत्तर स्मरण रखने चाहिए ।


प्रश्न  - “ क्या खायें ?”


उत्तर - “ सतोगुणी, अहिंसात्मक विधि से प्राप्त खाद्य पदार्थों का ही सेवन करो । ”


प्रश्न  -  “कब खायें ?”


उत्तर - “अच्छी तरह भूख लगे तभी खाओ ।” 

प्रश्न  - “कैसे खायें ?”


उत्तर - “ दाँतों से खूब चबाकर, मन लगा के, ईश्वर का दिया हुआ प्रसाद समझ के, प्रेमपूर्वक शांत चित्त से खाओ ।”


प्रश्न  - “ किसलिए खायें ?”


उत्तर - “ शरीर में शक्ति बनी रहे, जिससे कि सेवा हो सके इसलिए खाओ और दूसरों की प्रसन्नता के लिए खाओ परन्तु अधिक अमर्यादित विधि से न खाओ । किसी को रुलाकर न खाओ । अशांतचित्त होकर भीतर-ही-भीतर स्वयं रोते हुए भी न खाओ । किसी भूखे के सामने उसे बिना दिये भी न खाओ । शुद्ध एकांत स्थान में भगवान का स्मरण करते हुए भोजन करो । अन्याय से, हिंसात्मक विधि से उपार्जित धान्य भी न लो । जहाँ पर धर्मात्मा प्रेमी भक्त, सज्जन न मिलें वहाँ प्राणरक्षामात्र के लिए आहार करो ।”


परिणामदर्शी ज्ञानियों का कथन है कि प्राणांतकाल में जिस प्रकार का अन्न, जिस कुल का, जिस प्रकार की प्रकृतिवाले दाता का अन्न उदर में रहता है, उसी गुण, धर्म, स्वभाववाले कुल में उस प्राणी का जन्म होता है ।


जिस प्रकार शरीरशुद्धि हेतु सदाचार, धनशुद्धि हेतु दान, मन: शुद्धि के लिए ईश्वर-स्मरण आवश्यक है, उसी प्रकार तन-मन-धन की शुद्धि के लिए व्रत–उपवास भी आवश्यक है और व्रत-उपवास की यथोचित जानकारी भी आवश्यक है । 


संदर्भ – ऋषि प्रसाद मासिक पत्रिका अक्टूबर २०१२ 

Previous Article विरुद्ध आहार का सेवन बन सकता है मृत्यु का कारण
Next Article अशुद्ध खुराक खाने से होता है जीवन शक्ति का ह्रास
Print
588 Rate this article:
2.0
Please login or register to post comments.

Healthy Kitchen List