Impact of Mental State on Our Digestion
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Impact of Mental State on Our Digestion

 जानिये कैसे आपकी भाव दशा का प्रभाव पड़ता है आपकी पाचनशक्ति पर ....

 खाने-पीने के विषय में खूब सावधानी रखनी चाहिए  | हम लोग अगर भयभीत होकर भोजन करें तो वह भी अच्छी तरह नहीं पचेगा | क्या खाते हैं इतना ही नहीं, अपितु किस भाव दशा से खाते हैं इसका भी ध्यान रखना पड़ेगा | किसीसे झगड़ा करके या किसी पर क्रोध करके उसी अवस्था में खाने बैठेगें तो भले गुलाबजामुन या रबड़ी खायें पर वह जहर का कम करेगा |

अगर क्रोध, थकान या चिंता लेकर नहीं खा रहे हैं, अपितु प्रसन्नचित्त, आनंदित व भगवद् भाव से परिपूर्ण होकर खा रहे हैं तो जहर भी आ गया तो मरने की संभावना बहुत कम हो जायेगी | भक्तिमती मीराबाई को जहर का प्याला दिया गया था, फिर भी उनकी ऊँची भावदशा के कारण जहर उन्हें मार न सका | भक्त प्रह्लाद को भी जहरीला भोजन दिया गया था, फिर भी वे नहीं मरे | इसका मतलब यह नहीं है कि हम खुश होकर, देव-मानव हास्य करके, फिर जहर खाकर देखें कि यह अपना मारक प्रभाव दिखाता है या नहीं | ऐसा न करें, यह अभिप्राय नहीं है |

क्रोधित, दु:खी और चिंतित भाव-दशा में भोजन कभी भी न करें | शांत व प्रसन्नचित्त होकर खूब चबा-चबाकर, मौन होकर भोजन करना चाहिए | पूज्य स्वामी श्री लीलाशाहजी महाराज भोजन के पूर्व दो मिनट खूब हँसते, फिर मौनपूर्वक भोजन करते थे | परिणामस्वरूप नब्बे साल की उम्र में भी वे सदा स्वस्थ रहते थे |      

                                                                                                                 (लोक कल्याण सेतु)

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