गौ-चंदन धूपबत्ती के लाभ
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गौ-चंदन धूपबत्ती के लाभ

कीटाणुरहित, पवित्र एवं आध्यात्मिक वातावरण बनाने के लिए....

  

एक सिगरेट का धुंआ आसपास के 6-8 व्यक्तियों को हानि कर सकता है । एक गौ-चंदन धूपबत्ती परिवार को सात्विकता, आरोग्यता व पवित्रता प्रदान कर दे यह स्वाभाविक है । आप गौ-चंदन धूपबत्ती एकाध बूंद घी लगाकर जलाते हैं तो हानिकारक परफ्यूम और सेंट वाले अगरबत्तियों के धुंए से बचकर उससे पाँच गुना लाभ पाते हैं । हानि कतई नहीं और स्वास्थ्य की दृष्टि से पवित्र लाभ । 

 

पिनियल ग्रन्थि सक्रिय करने में सहायक 

 

गौ-चंदन धूपबत्ती जलने के बाद उसमें मिलाया हुआ घी और जड़ी-बूटियों का रस अवशेष बच जायेगा उसका ललाट पर तिलक करने से शिवनेत्र को (आज्ञाचक्र) जिसे विज्ञानी पिनियल ग्रन्थि कहते हैं सक्रिय करने में सहायता मिलती है ।

 

यदि आप गौ-चंदन ही जलाते हैं तो अनसीधी गो सेवा भी करते हैं । कितने परिवारों की रोजी-रोटी में भी आप सहायक होते हैं । गो-माता की सेवा, गरीब कुटुंबों के रोजी-रोटी की दुआएँ और पर्यावरण में शुद्धि फैलाने का पुण्य आपको प्राप्त होता है । 

 

अनजाने में आपके पड़ोसी भी लाभान्वित होते हैं । 22 रुपये किलोग्राम कोयले के पाउडर से बनी अगरबत्ती में भिन्न-भिन्न प्रकार के जहरी सेंटों के सिवाय कुछ नहीं होता है । गौ-चंदन धूपबत्ती में चंदन, नागर मोथा, शुद्ध देशी घी, इलायची के छिलके और अन्य चीजें मिलायी जाती हैं । काली धूपबत्ती में जहरीले केमिकल्स, रबड़, पुराने टायरों का चूरा व हानिकारक द्रव्य होता है जो कार्बन डाइ-आक्साइड गैस पैदा करके आपके स्वास्थ्य व पर्यावरण को दूषित करने का पाप करते हैं । पैसे कमाने की लालच रखने वालों ने, धार्मिक लोगों की जेबें लूटना भी नहीं बख्शा और देवी-देवताओं के चित्रों को भी नहीं बख्शा अपने लोभ के आगे । काली धूपबत्ती अथवा कोयले के पाउडर की अगरबत्तियों में मिलाया हुआ सेंट आपके स्वास्थ्य व पर्यावरण को, कुटुंबी व पड़ोसियों को हानि पहुँचाते हैं । अगर आपके अड़ोस-पड़ोस में गाय हों तो आप उक्त मिश्रण से धूपबत्ती बनायें अथवा अपनी गौशाला की धूपबत्ती जलायें अन्यथा अगरबत्तियां न जलायें । आपका अगरबत्ती जलाने का उद्देश्य लाभ की जगह हानि न करे । इसकी आप अपने पर, पड़ोसियों पर, पर्यावरण पर कृपा करें ।

 

गोझरण अर्क के सेवन से पेट की खराबियाँ ठीक होती हैं । यह किडनी, लीवर, पाचन तंत्र व ज्ञान तंतु पर पड़े दुष्प्रभाव को हर लेता है । बुढ़ापे में लीवर व किडनी की तकलीफ तथा ऑपरेशन से बचा लेता है । दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन के लिए वैद्य की सलाह से अवश्य सेवन करें । 


विज्ञान ने भी साबित किया है कि गोबर, गोघृत से वायरस कीटाणु नष्ट हो जाते हैं । मच्छरों के उपद्रव से छुटकारा पाने के लिए किये जाने वाले रासायनिक जहरीले पदार्थों के प्रयोग से मच्छर तो भागेंगे लेकिन हानि भी होगी । इससे तो अच्छा है कि गौ-चंदन धूपबत्ती के ऊपर थोड़ा नीम का तेल लगाकर जलायें इस प्रकार मच्छर तो भागेंगे ही और कोई हानि भी नहीं होगी ।


धूपबत्ती और गोझरण अर्क यह प्रसाद औरों तक पहुंचाना अथवा सौगात देना आपके लिए शोभनीय कार्य है । 

 

आओ मिलकर पवित्रता फैलायें, स्वास्थ्य-सुरक्षा बढायें, ईश्वरीय आनंद पायें, औरों तक पहुँचायें । 

 

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