गौ महिमा
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गौ महिमा

गौमाता एक चलता-फिरता तथा मुफ्त दवा देनेवाला औषधालय * 

 

गौमाता मातृशक्ति की साक्षात प्रतिमा है । जिस दिन विश्व में गाय नहीं रहेगी, उस दिन विश्व मातृशक्ति से वंचित हो जाएगा । 

भगवान वेदव्यास के अनुसार गायों से सात्त्विक वातावरण का निर्माण होता है । उनके शरीर से दिव्य सुगंधयुक्त वायु प्रवाहित होती है इसलिए जहाँ गाय रहती है वहाँ कोई भी दूषित तत्त्व नहीं रहता । 'पद्म पुराण' में ब्रह्माजी नारदजी से कहते हैं कि गायों की प्रत्येक वस्तु पावन है और वह संसार के समस्त पदार्थों को पवित्र कर देती है । 

 

गाय से हमें निम्न रूपों में ऊर्जा मिल रही है : 

1. गौपुत्र बैलों से कृषि-श्रम के रूप में ।

2. बैलों से परिवहन के लिए ।

3. गोबर से ईंधन के रूप में ।

4. गोबर से बायोगैस के रूप में ।

5. मनुष्य, पशु-पक्षी तथा वनस्पतियों के पोषण के लिए दूध तथा खाद के रूप में ।


गाय के दूध, घी, मट्ठा, मूत्र तथा गोबर से इतनी औषधियाँ मिल जाती हैं कि गाय के रहते हुए आपको डॉक्टर की इतनी तलाश  नहीं करनी पड़ेगी ।


यद्यपि सभी मनुष्य लक्ष्मीदेवी की पूजा में अधिक विश्वास करते हैं परंतु लक्ष्मी की जगह यदि गौमाता की पूजा की जाय तो अन्य लाभों के साथ-साथ लक्ष्मी तो स्वयं ही मिल जाती हैं । जिस प्रकार एक भक्त मात्र फूल-पत्तों से लक्ष्मी को प्रसन्न करके धन, ऐश्वर्य तथा खुशियाँ प्राप्त करता है, उसी प्रकार गोपालक गौमाता को घास-पट्टी, भूसा आदि अर्पण करके उनसे दूध, दही, घी, मट्ठा जैसे खाद्य पदार्थों के साथ ही सुख-संपदा तथा ऐश्वर्य भी प्राप्त करता है । 

 

आज पूरे विश्व में बढ़ते प्रदूषण से त्राहि-त्राहि मची हुई है । जीवन के लिए आवश्यक वायु, जल तथा खाद्य पदार्थ रोग पैदा करने के मुख्य स्रोत हो गये हैं । आजकल प्रदूषण के कारण नये-नये रोग पैदा हो रहे हैं । जब तक उनके लिए दवा की खोज होती है तब तक रोग नया रूप धारण कर लेता है । बढ़ते हुए प्रदूषण से ओजोन की परत क्षीण होती जा रही है, रोगों की संख्या बढ़ती जा रही है तथा गर्मी-वर्षा एवं जाड़े की ऋतुओं का संतुलन बिगड़ता जा रहा है । मानव जाति अपने आधुनिकीकरण की होड़ में इतनी मदहोश हो चुकी है कि उसे जब होश आयेगा तब तक सब कुछ स्वाहा हो चुका होगा । 

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि गौमाता एक चलता-फिरता तथा मुफ्त दवा देनेवाला औषधालय है । ऐसे प्राणी की रक्षा करना सभी भारतवासियों का परम धर्म है । 


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