जीवन में विचारों को, सिद्धांतों को प्रतिष्ठित करने के लिए उपासना जरूरी
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जीवन में विचारों को, सिद्धांतों को प्रतिष्ठित करने के लिए उपासना जरूरी

जगत में शक्ति के बिना कोई काम सफल नही होता है । चाहे आपका सिद्धांत कितना भी अच्छा हो, आपके विचार कितने भी सुंदर और उच्च हों लेकिन अगर आप शक्तिहीन हैं तो आपके विचारों का कोई मूल्य नही होगा । विचार अच्छा है, सिद्धांत अच्छा है, इसलिए सर्वमान्य हो जाता है ऐसा नही है । सिद्धांत या विचार चाहे कैसा भी हो, उसके पीछे शक्ति जितनी ज्यादा लगाते हो  हो उतना वह सर्वसामान्य होता है । चुनाव में भी देखो तो हार-जीत होती रहती है । ऐसा नहीं है कि यह आदमी अच्छा है इसलिए चुनाव में जीत गया और वह आदमी बुरा है इसलिए चुनाव में हार गया । आदमी अच्छा हो या बुरा, चुनाव में जीतने के लिए जिसने ज्यादा शक्ति लगायी वह जीत जायेगा । हकीकत में जिस किसी विषय में जो ज्यादा शक्ति लगाता है वह जीतता है । वकील लोगों को भी पता होगा, कई बार ऐसा होता है कि वकील चाहे ईमानदार हो चाहे बेईमान परन्तु जिस वकील के तर्क जोरदार-जानदार होते हैं वह मुकदमा जीत जाता है ।

 

ऐसे ही जीवन में विचारों को, सिद्धांतो को प्रतिष्ठित करने के लिए शक्ति चाहिए, बल चाहिए, ढृढ़ निश्चय चाहिए ।

उपासना अत्यंत आवश्यक

 

साधकों के लिए उपासना अत्यंत आवश्यक है । जीवन में कदम-कदम पर कैसी-कैसी मुश्किलें, कैसी-कैसी समस्याएँ आती हैं ! उनसे लड़ने के लिए, सामना करने के लिए भी  बल चाहिए । वह बल उपासना-आराधना से मिलता है ।

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