अनंत गुना फलदायी मानस-पूजा
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अनंत गुना फलदायी मानस-पूजा

गुरुपूर्णिमा विशेष : 16 जुलाई


व्यासपूर्णिमा के दिन इस उत्सव-निमित्त साधक को व्रत करना चाहिए और वह व्रत तब तक बना रहे जब तक उस सच्चिदानंदस्वरुप परमात्मा की ठीक से स्नेहमयी पूजा सम्पन्न नहीं होती । षोडशोपचार से पूजा करने का सामान्य पूजा से कई गुना ज्यादा फल माना गया है परंतु मानस-पूजा का प्रभाव और अधिक माना गया है । तो पूर्णिमा के एक दिन पहले ही रात्रि को सोते समय संकल्प करें कि ‘कल सुबह हम नींद में से उठते ही गुरु के दिये हुए ज्ञान और गुरुस्वरूप परमात्मा का चिंतन करेंगे । परमेश्वर-तत्व जिनमें प्रकटा है उन सद्गुरुओं को तो देखा भी है । मन-ही-मन उनका मानसिक पूजन करेंगे ।’

 

गुरुदेव का मानसिक पूजन करना न भूलें  

 

गुरुपूनम की सुबह उठे और मन-ही-मन गुरुदेव का मानसिक पूजन करे । फिर नहा-धोकर विधिवत् धूपबत्ती, प्राणायाम, गुरुगीता का पाठ आदि करके बाह्य पूजन धूपबत्ती या षोडशोपचार से भी कर सकते हैं और फिर मानसिक पूजन करिये । पूजन तब तक बार-बार करते रहें, जब तक आपका पूजन गुरुदेव तक नहीं पहुँचा ।पूजन पहुँचने का एहसास होगा, अष्टसात्विक भावों में से कोई-न-कोई भाव भगवत्कृपा से आपके हृदय में प्रकट होगा और जब कोई भाव प्रकट हो जाय अष्टभावों में से तो समझ लेना अब मानसिक पूजन, उपवास हमारा सफल हो गया । आप इस प्रकार गुरुपूर्णिमा का महोत्सव व्यावहारिक रूप के साथ ही आध्यात्मिक रूप में भी मना के इसका अनंत गुना फायदा लें - ऐसी मैं आपको सलाह देता हूँ,  इससे आपको विशेष लाभ होगा ।  - पूज्य संत श्री आशारामजी बापू

 

(ऋषि प्रसाद जुलाई 2016 )  

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