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प्रातःकालीन भ्रमण
प्रातःकालीन भ्रमण
  • प्रातः एवं सायं भ्रमण उत्तम स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभप्रद है । पशुओं का राजा सिंह सुबह 3.30 से 5 बजे के दौरान अपने बच्चों के साथ उठकर गुफा से बाहर निकल के साफ हवा में भ्रमण कर आसपास की किसी ऊँची टेकरी पर सूर्य की ओर मुँह करके बैठ जाता है। सूर्य का दर्शन कर शक्तिशाली कोमल किरणों को अपने शरीर में लेने के पश्चात ही गुफा में वापस आता है। यह उसके बलशाली होने का एक राज है ।
  • सुबह-सुबह ओस से भीगी घास पर नंगे पैर चलना आँखों के लिए विशेष लाभदायी है।
  • जो लोग किसी भी प्रकार की कोई कसरत नही कर सकते, उनके लिए टहलने की कसरत बहुत जरूरी है।
  • टहलना कसरत की सर्वोत्तम पद्धति मानी गयी है क्योंकि कसरत की अन्य पद्धतियों की अपेक्षा टहलने से हृदय पर कम जोर पड़ता है तथा शरीर के एक-दो नहीं बल्कि सभी अंग अत्यंत सरल और स्वाभाविक तरीके से सशक्त हो जाते हैं।
  • भ्रमण पूज्य बापू जी की दिनचर्या का एक अभिन्न अंग है। उत्तम स्वास्थ्य की इस कुंजी के द्वारा आप मानो चरैवेति चरैवेति। आगे बढ़ो, आगे बढ़ो। यह वैदिक संदेश ही जनसाधारण तक पहुँचाना चाहते हैं। पूज्य श्री कहते हैं- "प्रातः ब्राह्ममुहूर्त में वातावरण में निसर्ग की शुद्ध एवं शक्तियुक्त ओजोन वायु का बाहुल्य होता है, जो स्वास्थ्य के लिए हितकारी है।
  • प्रातःकाल की वायु को, सेवन करत सुजान।

    तातें मुख छवि बढ़त है, बुद्धि होत बलवान।।

  • भ्रमण नियमित होना चाहिए। अधिक चलने से थकान आ जाती है। थकान से तमोगुण आ जाता है। सर्वथा न चलने से भी मनुष्य आलसी हो जाता है। उससे भी तमोगुण आ जाता है। अतः प्रतिदिन अवश्य भ्रमण करना चाहिए।

 

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