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वास्तु संबंधित सामान्य प्रश्न व निराकरण
वास्तु संबंधित सामान्य प्रश्न व निराकरण
  • प्रश्नः मकान में रहने वालों के स्वास्थ्य पर वास्तु कैसे प्रभाव डालती है ?
    उत्तरः वास्तु के अनुरूप बने मकान में सभी रहने वाले स्वस्थ होंगे। अन्यथा वह एक या अन्य स्वास्थ्य की परेशानी से पीड़ित हो सकते हैं उदाहरण के तौर परनैऋत्य में कुआँ या बोर होने से माता पिता गंभीर रोग से ग्रसित होंगे। अग्नि कोण में कुआँ होने से बच्चों और स्त्रियों को स्वास्थ्य संबंधी बड़ी परेशानी होगी।

             पूर्व की दीवाल पर निर्माण और पश्चिम व दक्षिण में ज्यादा खुली जगह होने से घर के मालिक को हृदय रोग होने का अंदेशा रहेगा।
             अगर ईशान में कुआँ, और मुख्य दरवाजा हो, भवन नैऋत्य खंड में बना हो तथा ढाल वास्तु अनुरूप हो तो वहाँ के रहवासी स्वस्थ व सुखी होंगे।

 

  • प्रश्नः वास्तु गृहवासियों के आर्थिक जीवन को कैसे प्रभावित करती है ?
    उत्तरः मकान के ईशान में भूमिगत पानी कुआँ∕बोरहो, द्वार ईशान, उत्तर या पूर्व क्षेत्र में हो (पूर्व, उत्तर की दीवार का हिस्सा पूरा पूर्व नहीं होता – पूर्व और दक्षिण का कोना अग्नि कोण व उत्तर व पूर्व का कोना ईशान कोण होता है।) दक्षिण व पश्चिम में कम खुली जगह से आर्थिक स्थिरता रहती है। नैऋत्य का मुख्य द्वार होने से आर्थिक खिंचाव रहता है।

  • प्रश्नः बच्चों की अच्छी शिक्षा हेतु किस तरह के वास्तु चाहिए ?
    उत्तरः उत्तर व पूर्व में ज्यादा खुली जगह, अध्ययन कक्ष का ईशान में रखना व पूर्व की तरफ मुँह रखकर पढ़ाई करना विद्यार्थी व शैक्षणिक अभ्यास को अच्छा बल प्रदान करता है।

  • प्रश्नः क्या वास्तु सुधार से कैंसर के रोगी ठीक किये जा सकते हैं ?
    उत्तरः प्रथम स्टेज के कैंसर रोगी को उपचार के दौरान अच्छे वास्तु में रखने से सहायता मिलती है।

  • प्रश्नः क्या एक रूग्ण उद्योग को वास्तु द्वारा एक स्वस्थ उद्योग बनाया जा सकता है ?
    उत्तरः सामान्यतः सभी रूग्ण उद्योग को वास्तु सुधार से सुधारा जा सकता है। निम्न परिवर्तन जरूरी है।
    मुख्य द्वार को ईशान∕पूर्व∕उत्तरमें, ईशान में भूमिगत जल टंकी∕टयूबवेलवबिल्डिंगकेअन्यसुधारोंद्वाराआर्थिकसमस्याएँकाफीहदतकदूरकीजासकतीहैं।
    कुछ मामलों में जहाँ दक्षिण व पश्चिम में ज्यादा खाली जगह रखकर-ईशान∕पूर्व∕उत्तरमेंज्यादानिर्माणहोगयाहोवहाँदक्षिण, पश्चिम में नया निर्माण करना जरूरी होगा।
    कुछ हालातों में वास्तु सुधार काफी मुश्किल होता है। उदाहरण के तौर पर दक्षिण-पश्चिम को खाली रखते हुए ईशान में मुख्य उद्योग स्थापित हो गया है और यहाँ भारी मशीनरी भी लगी हो अथवा ईशान∕पूर्व∕उत्तरमेंबड़ेपहाड़वऊँचाईहो।

  • प्रश्नः क्या वास्तु किरायेदारों पर भी असर करती है ?
    उत्तरः "हाँ" वास्तु वहाँ के सभी निवासियों, मकान मालिक व किरायेदारों दोनों को प्रभावित करती है।

  • प्रश्नः क्या वास्तु के प्रभाव सभी जाति व धर्म के लोगों पर समान होते हैं ?
    उत्तरः "हाँ" वास्तु जाति, धर्म व मजहब से संबंध नहीं रखती क्योंकि प्रकृति के पाँचों तत्त्व सभी के लिए समान हैं और आपस में सम्बन्धित हैं।

 

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