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अशुभ क्या है ?
अशुभ क्या है ?

 

  • बिल्ली की धूलि शुभ प्रारब्ध का हरण करती है । (नारद पुराणः पूर्व भागः 26.32)
  • कुत्ता रखने वालों के लिए स्वर्गलोक में स्थान नहीं है । उनका पुण्य क्रोधवश  नामक राक्षस हर लेते हैं । (महाभारत महाप्रयाण पर्वः 3.10)
  • 'महाभारत' में यह भी आया है कि 'घऱ में टूटा-फूटा बर्तन, सामान (फर्नीचर), मुर्गा, कुत्ता, बिल्ली होना अच्छा नहीं है । ये शुभ गुणों को हरते हैं ।
  • दूसरे का अन्न, दूसरे का वस्त्र, दूसरे का धन, दूसरे की शय्या, दूसरे की गाड़ी, दूसरे की स्त्री का सेवन और दूसरे के घर में वास – ये इन्द्र के भी ऐश्वर्य को नष्ट कर देते हैं । (शंखलिखित स्मृतिः 17)
  • जिस तरह शरीर में जीवन न हो तो वह मुर्दा शरीर अशुभ माना जाता है । इसी तरह खाली कलश भी अशुभ है । दूध, घी, पानी अथवा अनाज से भरा हुआ कलश कल्याणकारी माना जाता है । भरा हुआ घड़ा मांगलिकता का प्रतीक है ।
  • वास्तुशास्त्र के अनुसार घर की पश्चिम दिशा में पीपल का वृक्ष होना शुभ है । इसके विपरीत पूर्व दिशा में होना विशेष अशुभ है ।
  • आँवला, बिल्व, नारियल, तुलसी और चमेली सभी दिशाओं में शुभ हैं । कुछ अन्य वृक्षों के लिए शुभ दिशाओं की सूची -

जामुन – दक्षिण, पूर्व, उत्तर

अनार – आग्नेय, नैर्ऋत्य कोण

केला – तुलसी के साथ सभी दिशाओं में

चंदन – पश्चिम, दक्षिण (पूर्व विशेष अशुभ)

बड़  -  पूर्व (पश्चिम विशेष अशुभ)

कनेर – पूर्व, उत्तर (पश्चिम विशेष अशुभ)

नीम – वायव्य कोण (आग्नेय विशेष अशुभ)

  • घर में बाँस, बेर, पपीता, पलाश और बबूल के वृक्ष सभी दिशाओं में अशुभ माने जाते हैं । आम पूर्व में, सीताफल व गुलाब ईशान कोण में विशेष अशुभ हैं ।
  • अशुभ वस्तुएँ जैसे कि मांस, दुर्घटना का दृश्य, मृतक जीव-जन्तु दिखायी देने पर उसी समय सूर्यनारायण के दर्शन कर लेने चाहिए ।

 

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