ShrimadBhagwadGita

ShrimadBhagwadGita

                                                    श्रीमद्भगवतगीता 


कुरुक्षेत्र के मैदान में भगवान श्रीकृष्ण के श्रीमुख से निकला वेद और उपनिषदों का सार ‘श्रीमद्भगवतगीता’ का ज्ञान आज भी मनुष्यमात्र का पथप्रदर्शन कर रहा है | ‘श्रीमद्भगवतगीता’ केवल हिन्दुओं के लिए या भारतवासियों के लिए ही नहीं अपितु विश्वमानव के लिए कल्याणकारी व उपयोगी है | ‘श्रीमद्भगवतगीता’ दार्शनिक के दर्शन , वैज्ञानिक के लिए विज्ञान, नितिज्ञ के लिए नीति , तथा साधक के लिए साधना का मार्ग प्रशस्त करती है | इसमें कर्मयोग , भक्तियोग , ज्ञानयोग –तीनों का सुन्दर समन्वय है | गीताजी के पाठ से मन-बुद्धि-विचार शुद्ध होने लगते है | जिस मनुष्य के जीवन में ‘श्रीमद्भगवतगीता’ का ज्ञान है , वह संसार की तमाम विघ्न-बाधाओं के बीच भी आनंद से रहता है और अपने परमात्म-पद को पाने में सफल हो जाता है | गीता के इस दुर्लभ ज्ञान की अनुभूति गीता के मर्मज्ञ आत्मसाक्षात्कारी महापरुष के चरणों में जाने से ही होती है | वर्तमान की विकट समस्याओं का समाधान गीता-ज्ञान से ही संभव है |

      आज कई देश गीता-ज्ञान को अपनाकर अपने-आपको उन्नत महसूस कर रहे हैं | मैनेजमेंट सिखानेवाली कई विदेशी संस्थाएँ अपने पाठ्यक्रम में ‘श्रीमद्भगवतगीता’ को शामिल कर रही हैं | देश-विदेश के अनेकानेक महापुरुष , विद्वानों एवं तत्वचिंतकों ने भी गीता को उत्कृष्ट ग्रंथ घोषित किया गया है |

                                   

                                    श्रीमद्भगवतगीता के बारे में महापुरुषों के विचार  

भगवद्गीता के स्पष्ट ज्ञान से मनुष्य के अस्तित्व के सभी लक्ष्य पूर्ण हो जाते हैं | भगवद्गीता वैदिक धर्म ग्रंथो के सभी उपदेशों का सार स्वरूप है 

-श्रीमद आद्य शंकराचार्य जी

जीवन के सर्वांगीण विकास के लिए गीताग्रंथ अदभुत है। विश्व की ५७८ भाषओं में गीता का अनुवाद हो चूका है | हर भाषा में कई चिन्तकों विद्वानों एवं भक्तों मीमांसाएं की हैं और अभी भी हो रही है होती रहेंगी क्योंकि इस ग्रंथ में किसी भी देश,जाति,पंथ के सभी मनुष्यों के कल्याण की अलौकिक सामग्री भरी हुई है | अत: हम सबको गीताज्ञान में अवगाहन करना चाहिए | भोग , मोक्ष , निर्लेपता , निर्भयता आदि तमाम दिव्य गुणों का विकास करानेवाला यह गीताग्रंथ विश्व में अद्वीत्य है |

ब्रह्मलीन ब्रह्मनिष्ठ पूज्यपाद स्वामी श्री लीलाशाहजी महाराज

भगवद्गीता ऐसे दिव्य ज्ञान से भरपूर है कि उसके अमृतपान से मनुष्य के जीवन में साहस , हिम्मत , समता ,सहजता , स्नेह , शांति और धर्म आदि दैवी गुण विकसित हो उठते हैं , अधर्म और शोषण का मुकाबला करने का सामर्थ्य आ जाता है । अतः प्रत्येक युवक – युवती को गीता के श्लोक कण्ठस्थ करने चाहिए और उनके अर्थ में गोता लगाकर अपने जीवन को तेजस्वी-ओजस्वी बनाना चाहिए ।         

- पूज्य बापूजी

 

 

 

Previous Article KavyaGunjan - Naari Mahima
Next Article Tulsi Mahima
Print
200 Rate this article:
No rating

Please login or register to post comments.

Name:
Email:
Subject:
Message:
x