To Receive the Divine Knowledge of God...

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 परमात्म-ज्ञान को सहज ढंग से पाना है तो ..अपनाएँ ये १० बातें

यदि आपके जीवन में ये दस बातें हैं तो जीवन में परमात्म-ज्ञान का प्रकाश सहज-सुलभ हो जायेगा |

श्रीमद् भागवत के ग्यारहवें स्कंध के तेरहवें अध्याय के चौथे श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण उद्धवजी को बोलते हैं :

“शास्त्र, जल, प्रजाजन, देश, समय, कर्म, जन्म, ध्यान, मंत्र और संस्कार- ये दस वस्तुएँ यदि सात्विक हों तो सत्वगुण की, राजसिक हों तो रजोगुण की और तामसिक हों तो तमोगुण की वृद्धि करती हैं |”

जीवन अगर महान बनाना है तो १० बातों का ध्यान रखो :

१.                शास्त्रों का ज्ञान, सत्संग अपने जीवन में रखो |

२.                आप पीते क्या हैं ? पानी कैसा पीते हैं ? गंगाजल पीते हैं, पवित्र जल पीते हैं कि जिस किसीका जूठा पीते हैं, इसका ध्यान रखो |

३.                आप कैसे लोगों से मिलते हैं ? जो नास्तिक हैं, शराबी-कबाबी हैं उनसे दोस्ती है कि जिनको भगवान मिले हैं ऐसे महापुरुषों का संग है | आप सज्जनों का, आस्तिकों का संग करो, दुर्जनों, निगुरों, नास्तिकों का नहीं |

४.                आप जिस घर में रहते हैं, जिस वातावरण में रहते हैं वहाँ के संस्कार कैसे हैं ? कसाई के विचारोंवाला घर है कि भगवद् भाववाला घर है ? जिस जमीन पर पहले कसाईखाना होता है, वहाँ जो अपना घर-मकान बनाते हैं, उनको भी मारकाट के विचार आते हैं, ऐसे कई तथ्य सामने आये हैं | तो आप जहाँ रहते हैं वह भूमि, वातावरण पवित्र है कि मोह-माया में गिरानेवाला है ? 

५.                आप सूरज उगने के बाद उठते हो कि सूरज उगने के पहले उठते हो ? सूरज उगने के बाद नहाते हो कि पहले नहाते हो ? रात्रि को देर से भोजन करोगे तो मोटे हो जाओगे और बीमारियों का घर बन जाओगे | रात्रि को जल्दी व अल्प भोजन और जल्दी शयन तथा सुबह जल्दी जागरण – इस प्रकार आप करेंगे तो आपको लाभ मिलेगा |

६.                आप कर्म कैसे करते हैं ? अच्छे संस्कार भरनेवाले कर्म करते हैं कि गंदे संस्कार भरनेवाले कर्म करते हैं ? कर्म को बंधन बनानेवाले और नरकों में लेजानेवाले कर्म करते हैं कि कर्म-बंधन काट के भगवान में विश्रांति दें ऐसे कर्म करते हैं ?

७.                जन्मों-जन्मों के आपके संस्कार और दीक्षा-शिक्षा कैसी है ? उससे भी स्वभाव बनता है |

८.                आप भगवद्ध्यान से अपना ज्ञान उत्पन्न करते हैं कि काम, क्रोध से अपने ज्ञान की दिशा बनाते हैं ? भगवद्ध्यान, सुमिरन से अपना रास्ता बनाते हैं कि बेईमानी करके, कपट का आसरा लेकर फिर अपनी बुद्धि को लगाते हैं ?

९.                मंत्र देनेवाले आपके गुरु कैसे हैं और मंत्र कैसा है ? ‘अला बाँधूँ, बला बाँधूँ’ वाला टूने-टोटके का मंत्र है कि वैदिक मंत्र है और मंत्र देनेवाले गुरु परमात्मप्रीतिवाले हैं कि ऐसे हैं ? समर्थ गुरु से मंत्र लेना चाहिए |

१०.          भगवान बोलते हैं कि अच्छे संस्कार धारण करने का व्रत ले लो | किसीमें हजार बुराइयाँ हों फिर भी उस व्यक्ति में से भी गुण ले लो | किसीमें हजार गुण हैं और एक अवगुण है या दस अवगुण हैं तो उन अवगुणों को नहीं देखो | आप गुण ले लो एवं गुणों के आधार गुणनिधान प्रभु मेरे, मैं भगवान का’- ऐसा चिंतन करने से आप उस नित्य ज्ञान में टिकने में तत्पर हो जायेंगे, आपका मंगल हो जायेगा |

यदि आपके जीवन में ये दस बातें हैं तो जीवन में परमात्म-ज्ञान का प्रकाश सहज-सुलभ हो जायेगा |  

 

(ऋषि प्रसाद मासिक पत्रिका)

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