RakshaBandhan

रक्षाबंधन कार्यक्रम

भारतीय संस्कृति विश्व की महान संस्कृतियों में से एक है और सदा से ही हमारी संस्कृति में वसुधैव कुटुंबकम् का भाव रहा है, इसी शुभभाव की अभिव्यक्ति महिला उत्थान मंडल का बहनें प्रतिवर्ष आत्मविकास का परिचायक रक्षाबंधन महोत्सव मनाकर करती हैं । इस दिन बाँधा जानेवाला रक्षासूत्र मात्र एक धागा नहीं बल्कि शुभ भावनाओं व शुभ संकल्पों का पुंज है । यह सूत्र यदि वैदिक रीति से बनाकर भगवद्भाव व शुभ संकल्पों सहित बाँधा जाय तो इसका सामर्थ्य असीम हो जाता है । एक समय देवासुर संग्राम में देवराज इन्द्र को उनकी पत्नी शची ने अभिमंत्रित रक्षासूत्र बाँधा था जिसके फलस्वरुप वे युद्ध में विजयी हुए व उनकी रक्षा भी हुई । इसके अतिरिक्त हमारे शास्त्रों में राजा बलि, वीर अभिमन्यु जैसे अनेकानेक उदाहरण वर्णित हैं जो इस रक्षासूत्र के सामर्थ्य को दर्शाते हैं ।

परम पूज्य बापूजी की प्रेरणा से वैदिक रक्षासूत्र के इसी सामर्थ्य का सदुपयोग देशसेवा में हो तथा देश की रक्षा में समर्पित सुरक्षा-प्रहरीयों (BSF,CRPF,ARMY) का मनोबल बढ़े, उनका शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक विकास हो, उनकी रक्षा हो इसी शुभभाव से वैदिक रक्षासूत्र बाँधकर उनकी सुरक्षा की मंगलकामना की जाती है । इसके साथ ही देश के गणमान्य महानुभावों व विभिन्न क्षेत्रों के उच्च पदाधिकारियों को भी रक्षासूत्र बाँधा जाता है ।

Raksha Bandhan festival was celebrated at Janhit Seva Samruddhi Orphanage, Turahalli, Bengaluru by Mahila Utthan Mandal

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Raksha-Bandhan Celebrations

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