Garbha Sanskar Kendra

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                                       गर्भसंस्कार क्या है 

गर्भस्थ शिशु को संस्कारित करना ही गर्भसंस्कार है । किसी भी महल की नींव जितनी मजबूत होती है उतना ही मजबूत महल बनता है । शिशु को महान बनाने के लिए सबसे मजबूत नींव माता का गर्भ है , जहाँ से उसके नये जीवन की शुरुआत होती है । संस्कारों से ही बच्चे सद्गुणी, उच्च विचारवान , सदाचारी , सत्कर्मपरायण , आदर्शपूर्ण , साहसी एवं संयमी बनेंगे । बच्चों के ऐसा बनने पर परिवार , देश तथा समाज भी ऐसा ही बनेगा । इसके लिए सबसे अधिक आवश्यकता है माता को नौ माह तक स्वयं को संयमित तथा अनुशासित रखने की । गर्भावस्था में शिशु व माता का बहुत ही प्रगाढ़ संबंध होता है । माता के पेट में शिशु नौ माह गुजारता है । इस अवधि में शिशु को एक अति कोमल नाल द्वारा माता के श्वास से श्वास तथा भोजन से पोषण मिलता रहता है । इस दौरान स्वाभाविक ही माता के शारीरिक , मानसिक व नैतिक स्थिति का प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर पड़ता है । उत्तम माताएँ ही उत्तम संतान उत्पन्न करती हैं । भारतवर्ष में आपका जन्म हुआ है । आप तो श्रेष्ठ माताएँ हो ही । बस, जिन शास्त्रोक्त नियमों को हमारे पूर्वजों ने अपनाया उन्हें आप भी अपनी दिनचर्या में लाकर आसानी से महान संतान की माता होने का गौरव प्राप्त कर सकती हैं ।

         गर्भस्थ शिशु को सुसंस्कारी बनाने तथा उसके उचित पालन – पोषण की जानकारी देने हेतु पूज्य संत श्री आशारामजी बापू द्वारा प्रेरित महिला उत्थान मंडल द्वारा ‘गर्भ संस्कार केन्द्र ‘ आरंभ किए गए हैं । जिसमें गर्भवती माता को शास्त्रीय नियमों के अंतर्गत एक आदर्श दिनचर्या का पालन किस प्रकार सरलता से किया जा सकता है , यह बताया जाता है । इन शास्त्रीय नियमों का पालन करते हुए वह ओजस्वी – तेजस्वी , स्वस्थ , सुंदर व प्रभावशाली संतान को बिना ऑपरेशन के जन्म दे सकती है , यह भी इन संस्कार केन्द्रों में बताया जाता है । गर्भ संस्कार केन्द्र में दिव्य आत्माओं के आह्वान की विधि भी बताई जाती है । पूज्य बापूजी का ब्रह्मसंकल्प है कि भारत विश्वगुरु बनकर रहेगा । गुरुदेव के संकल्प को पूरा करने के लिए भारत में दिव्य आत्माओं का अवतरण अति आवश्यक है । अतः हर घर में दिव्य और संस्कारी संतानें अवतरित हों , हमारे इन गर्भसंस्कार केन्द्रों का मुख्य उद्देश्य यही है । 

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