गर्भ संस्कार ...उज्जवल भविष्य का आधार

गर्भ संस्कार ...उज्जवल भविष्य का आधार

                  

गर्भस्थ शिशु का विधि-अनुसार पालन-पोषण एवं उसके साथ माँ का सत्संग-ज्ञान संयुक्त संवाद करता है –शिशु के उज्जवल भविष्य का निर्माण

ऋग्वेद में आता है : शिशुला न क्रीलय: सुमातरो उत्तम माताएँ ही उत्तम संतान उत्पन्न करती हैं । स्वामी रामतीर्थजी कहते हैं : “महापुरुष सदा ही श्रेष्ठ माताओं के पुत्र हुआ करते हैं ।” उच्च प्रकृति-सम्पन्न माता-पिता से ही उदार चरित्रवाले पुरुषों की उत्पत्ति होती है, इस सिद्धांत को अब आधुनिक विज्ञान ने भी स्वीकार किया है । “हेरिडिटी जीनियस” पुस्तक के लेखक फ्रान्सिस गाल्टन भी इस तथ्य का प्रतिपादन करते हैं ।

आइये जानते हैं संस्कार क्या है ?

किसी भी महल की नींव जितनी मजबूत होती है उतना ही मजबूत महल बनता है । शिशु को महान बनाने के लिए सबसे मजबूत नींव माता का गर्भ है, जहाँ से उसके नये जीवन की शुरुवात होती है । अपनी वैदिक संस्कृति में मानव-जीवन को सुसंस्कारित करने के लिए गर्भाधान से मृत्युपर्यन्त सोलह संस्कारों का विधान है । महर्षि चरक ने कहा है : ‘संस्कारो हि गुणान्तराधानमुच्यते’ अर्थात पहले से विद्यमान दुर्गुणों को हटाकर उनकी जगह सद्गुणों का आधान कर देने का नाम संस्कार है ।

गर्भ से ही संस्कार की आवश्यकता क्यों ?

कच्ची मिटटी के बनते हुए बर्तन पर जो चित्र खींचा जाता है, वह दृढ़ता से अंकित हो जाता है । इसी तरह मनुष्य के बचपन या गर्भ में स्थित रहने पर जो संस्कार डाला जाता है, वह दृढ हो जाता है । संस्कारों से ही बच्चे सद्गुणी, उच्च, विचारवान, सदाचारी, सत्यकर्मपरायण, आदर्शपूर्ण, साहसी एवं संयमी बनेगें । बच्चों के ऐसा बनने पर परिवार, देश तथा समाज भी ऐसा ही बनेगा किन्तु बच्चों के संस्कारहीन होने से वे इन सभीको दूषित करेंगें ।

आज बढ़ते जा रहे चोरी, व्यभिचार, कलह, वैर, आंतकवाद, युद्ध आदि के पीछे संस्कारहीनता ही प्रमुख कारण दिखाई देता है । इसलिए अपनी वैदिक संस्कृति में संतान पर जन्म के पूर्व से ही संस्कार कराने का विधान है ।

तो ऐसे में गर्भ में ही करें बच्चों को अच्छे संस्कारों से युक्त

इतिहास इस बात का साक्षी है कि माता-पिता के अच्छे संस्कारों, उनके आचरणों, उनकी प्रेरणाओं का प्रभाव बच्चों पर पड़ता है । भरत, बालक ध्रुव, अभिमन्यु, वीर शिवाजी, पूज्य बापूजी आदि सभी के जीवन में माता-पिता के आदर्श आचरणों का प्रबल प्रभाव पड़ा ।

हर माता -पिता की यह प्रबल इच्छा होती है कि उनकी संतान उनकी अपेक्षा के अनुसार बने परन्तु उत्तम संस्कारों के अभाव एवं अश्लीलता फैलानेवाले आधुनिक प्रसार माध्यमों, टीवी चैनलों आदि से मिलनेवाले कुसंस्कारों के प्रभाव में आकर आज की बाल-युवा पीढ़ी का नैतिक पतन होता जा रहा है । खानपान,रहन-सहन, चिंतन – मनन- सभी क्षेत्रों में पाश्चात्य कल्चर हावी होता जा रहा है । कुसंस्कारों की बाढ़ से बचाने हेतु माता कोचाहिये कि गर्भ में ही बच्चों को अच्छे संस्कारों से युक्त कर दे ।

यदि आपको चाहिए उत्तम संतान, तो गर्भावस्था में करें जप –ध्यान

हमारे शास्त्रों में गर्भाधान संस्कार का विधान इसी उदेश्य से किया गया है कि माता –पिता दोनों सावधान होकर धर्मानुष्ठानपूर्वक गुरुजनों की अनुमति से योग्य संतान उत्पन्न करने में समर्थ हों । यह बात प्राय: सिद्ध हो चुकी है कि गर्भाधान के समय पति-पत्नी के हृदय में जिस प्रकार के विचार होते हैं, उनके हृदय और अंतर्चक्षु के सम्मुख जो चित्र होता है, भावी शिशु उन सबके प्रतिबिम्ब को लेकर जन्म लेता है । भगवान श्रीकृष्ण ने व्रतपरायण रहकर साधना-उपासना करके रुक्मणि से चारूदेष्ण, शम्भु जैसे सुन्दर, पराक्रमी पुत्र उत्पन्न किये ।   

महिला उत्थान मंडल द्वारा गर्भ संस्कार केंद्र की शुरुवात  

इस आधुनिक युग में शास्त्र-वर्णित सरल कुंजियाँ बताकर भारत की आनेवाली पीढ़ियों को महान बनाने के उदेश्य से भारतीय संस्कृति के रक्षक-संवाहक पूज्य संत श्री आशारामजी बापू की प्रेरणा से महिला उत्थान मंडल द्वारा गर्भ संस्कार केंद्र की शुरुवात की गयी है ।

इन केन्द्रों में आप सीखेंगें

मन्त्रोच्चार द्वारा गर्भस्थ शिशु को कैसे करें संस्कारित ?

भगवन्नाम-जप से माता व गर्भस्थ शिशु को क्या होंगें लाभ ?

किस प्रकार का करें गर्भ संवाद ?

गर्भस्थ शिशु का आध्यात्मिक-बौद्धिक स्तर उच्च कैसे हो ?

सत्संग, सुमिरन आदि एवं विभिन्न प्रयोगों के द्वारा माता स्वयं व गर्भस्थ शिशु को कैसे रखे स्वस्थ ?

मासानुसार गर्भिणी का उचित खान-पान, सगर्भावस्था में ध्यान देने योग्य बातें आदि की जानकारी भी इन सत्रों में दी जायेगी ।

गर्भ संस्कार केंद्र की शुरुवात कैसे करें ?

भारतवर्ष में आपका जन्म हुआ है । आप तो श्रेष्ठ माताएँ हो ही । बस, जिन शास्त्रोक्त नियमों को हमारे पूर्वजों ने अपनाया उन्हें आप भी अपनी दिनचर्या में लाकर आसानी से महान संतान की माता होने का गौरव प्राप्त कर सकती हैं ।

तो आप भी अपने-अपने क्षेत्रों में इन केन्द्रों का शुभारंभ करने के लिए व इस दैवी कार्य से जुड़ने हेतु गर्भ संस्कार केंद्र पाठ्यक्रम भाग -१ जरूर पढ़े ।

गर्भ संस्कार केंद्र पाठ्यक्रम भाग -१ प्राप्त करने के लिए महिला उत्थान मंडल मुख्यालय, अहमदाबाद से सम्पर्क करें ।

 सम्पर्क सूत्र    - 09016934807

WhatsApp          -    09157306313

 

 

 

 

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