Garbha Sanskar - Divya Anubhav

Garbha Sanskar - Divya Anubhav

  माँ के गर्भ में पाये अच्छे संस्कार

१०वर्ष की उम्र में जीते ४ पदक

मेरी पुत्री आसावरी चौथी कक्षा में पढती है | जब वह पेट में थी उन दिनों मैं रोज श्री आशारामायण जी, विष्णुसहस्रनाम, गुरूगीता, ज्ञानेश्वरी गीता आदि सत्शास्त्रो का पाठ विशेष रूप से करती थी | नियम से जप – ध्यान करती थी |

पूज्य बापूजी कहते हैं  कि गर्भस्थ शिशु पर माँ के क्रियाकलापों का असर पड़ता है |  

यह मैंने प्रत्यक्ष देखा | हमने उसको बचपन से वे ही संस्कार दिए हैं जो हमें बापू जी से मिले है |

प्रतिदिन नियम से करती है हरी ॐ आदि मन्त्रों का जप

वह प्रतिदिन नियम से ‘ हरि ॐ’ , ‘ हरि ॐ’ आदि मंत्रो का जप करती है | उसे हमेशा बापूजी की कृपा का अनुभव होता है | जब वह दूसरी कक्षा में थी , तब उसे इंग्लिश ओलीमिपियाड में रजत पदक और गणित ओलीमिपियाड में कांस्य पदक मिला | तीसरी व चौथी – दोनों कक्षाओं में स्कूल स्तर पर इंग्लिश मैराथन में स्वर्ण पदक मिले |  यह सब मंत्र जप और पूज्य बापू जी की कृपा से संभव हुआ है |

कैसी है गुरुदेव की कृपा

एक बार वह गिर गई और घुटने से खून बह रहा था पर उसके चेहरे पर शिकन तक नहीं थी | मैंने पूछा : “ बेटी तुम्हें दर्द नहीं हो रहा है ?”

वह बोली : “ माँ ! बापूजी बोलते हैं , हम शरीर नहीं हैं , हम तो आत्मा हैं  |”

अभी तक उसने दीक्षा नहीं ली है पर हमेशा  खेलते – कूदते समय भी ‘ बापू-बापू ’, कभी ‘हरि -ॐ - हरि ॐ ’  बोलती रहती है |

वह कहती है कि “ मुझे ऐसा लगता है कि हर समय मेरे प्यारे बापू जी मेरे साथ हैं | ”

रेणुका हरने , पुणे (महा .)

सचल दूरभाष : ९३७३२९८३९८

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