Impact of Moral Values on Child inside Mother’s Womb

Impact of Moral Values on Child inside Mother’s Womb

                           गर्भस्थ शिशु पर संस्कारों का प्रभाव

  हमारे ऋषि-मुनियों ने अनादिकाल से यह बताया हुआ है कि बालक को गर्भावस्था व शैशवकाल में जिस प्रकार के संस्कार मिलते हैं, आगे चलकर वह वैसा ही बन जाता है । जैसे राक्षस हिरण्यकश्यपु की पत्नी कयाधू को सगर्भावस्था के दौरान देवर्षि नारदजी के सत्संग से भक्ति के संस्कार मिले तो गर्भस्थ बालक आगे चलकर महान भगवद्भक्त, ज्ञानी व कुशल शासक प्रह्लाद हुआ। इसी प्रकार अभिमन्यु ने माँ के गर्भ में ही चक्रव्यूह भेदने का ज्ञान पा लिया था । इतिहास में ऐसे और भी कई उदाहरण हैं | 

अब आधुनिक विज्ञान भी हमारे ऋषियों की बात को स्वीकार रहा है | शोधकर्ताओं के अनुसार गर्भावस्था में शिशु व माता का बहुत ही प्रगाढ संबंध होता है । इस दौरान स्वाभाविक ही माता के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य एवं आहार - विहार का प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर पड़ता है । अतः दिव्यता से सम्पन्न ओजस्वी-तेजस्वी, सुंदर व प्रभावशाली संतान के लिए गर्भावस्था में उचित आहार – विहार व आचरण संबंधी जानकारी हर स्त्री को होना अति आवश्यक है । गर्भस्थ शिशु को सुसंस्कारी बनाने तथा उसके उचित पालन-पोषण की जानकारी देने हेतु गर्भवती माताओं के लिए गर्भ संस्कार केन्द्र का शुभारम्भ किया जा रहा है ।

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