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भारतीय संस्कृति और पाश्चात्य संस्कृति
भारतीय संस्कृति और पाश्चात्य संस्कृति

 

प्रातकाल उठी कै रघुनाथा मातु पिता गुरु नावहिं माथा ।।

                      (श्री रामचरित. बा.का. : २०४.४)

बच्चे-बच्चियों को व्यवहार में सावधान रहना चाहिए । अपने घर में अथवा पड़ोस में यदि कोई वृद्ध हो, बीमार हो, विकलांग हो अथवा तो किसी भी प्रकार की शारीरिक-मानसिक अस्वस्थता वाला हो तो उसको देखकर खिल्ली नहीं उड़ानी चाहिए, उसकी मदद करनी चाहिए । उसका मजाक उड़ाकर पाप नहीं करना चाहिए बल्कि उसकी सेवा करके पुण्य का भागीदार बनना चाहिए ।

बड़ों का सम्मान, उनकी सेवा करनेवाले की आयु, विद्या, यश तथा बल में वृद्धि होती है, यह शिक्षा है भारतीय संस्कृति की और पाश्चात्य संस्कृति है घर के बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में डालने की, जिससे हमको सर्वथा दूर रहना चाहिए । जवानी खो जाय उसके पहले, जीवन खो जाय उसके पहले बड़े-बुजुर्गों की, माता-पिता की, जरूरतमंदों की सेवा करके उनका आशीर्वाद लेकर तथा संतों का संग करके कभी न खोनेवाले प्रभु का ज्ञान पा लेना चाहिए ।

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