EasyDNNNews

Bhagwan Naam Jap Mahima

Bhagwan Naam Jap Mahima

कलियुग में भगवान को प्राप्त करना है अधिक आसान  

·        (कलितारणहारा भगवन्नाम)   

Ø इस कलिकाल में भवसागर से पार होने के लिए भगवन्नाम एक मजबूत नौका है, जिसकी सहायतासे मनुष्य भवसागर से सरलता से पार हो सकता है | भगवन्नाम-महिमा का वर्णन करते हुए महर्षि वेदव्यासजी अपने शिष्यों को कहते है  ‘कलियुग धन्य है !’ व्यासजी के वचन सुनकर शिष्यों ने जिज्ञासापूर्वक प्रश्न किया कि “ “गुरूजी ! कलियुग में तो पाप, दुराचार, निंदा, राग-द्वेष अधिक होता है, फिर भी आप उसे धन्य कह रहे हैं |””

Ø व्यासजी ने कहा : ““मैं कलियुग को धन्य इसलिए कहता हूँ क्योंकि इसमें भगवान को प्राप्त करना अधिक आसान है | यह दूसरे युग में संभव ही नहीं है | कलियुग में निरंतर भगवन्नाम लेनेमात्र से मनुष्य उनको प्राप्त कर सकता है |

Ø “सतयुग में भगवान विष्णु के ध्यान से, त्रेता में यज्ञ से और द्वापर में भगवान की पूजा से जो फल मिलता था, वह सब कलियुग में भगवान के नाम-कीर्तनमात्र से प्राप्त हो जाता है |”

Ø ऐसा कलितारण भगवन्नाम सर्व पापों को हरकर परमात्म-प्रीति जगाने का आमोघ सामर्थ्य रखता है | भगवन्नाम-जप के प्रभाव से वह भगवान के प्रेमवश में बंध जाता है| पूतना ने कपट से प्रभु को पकड़ा पर भगवान ने जब उसे पकड़ा तो ऐसा पकड़ा कि उसने छुड़ाना चाहा तो भी नहीं छोड़ा, पूतना को पार कर दिया | 

इस प्रकार अंत: स्थल की परा वाणी के प्रकाशक उस प्रभु का कोई दम्भ, पाखंड या कामनावश भी नाम-सुमिरन करे तो भी उसका कल्याण निश्चित ही होता है| दुनिया में मनुष्य को अपने नाम का मोह ही दुःख देता है और जन्म-मरण के चक्कर में डालता है | अत: कीर्ति का मोह छोड़ने के लिए नामकीर्तन- जप के सिवा कोई उपाय नहीं है|

Ø गिरधर नाम का गान करते हुए भक्तिमती मीरा ने नाचकर प्रभु को रिझा लिया तो अकाल पुरुष आदि नामो का सुमिरन करते हुए उसमे शांत होकर गुरु नानकदेवजी ने प्रभु को पा लिया| विट्ठल, रामकृष्ण, हरि’ - इन भगवन्नामों से संत तुकारामजी ने भगवान की निष्काम उपासना कर पूर्णता प्राप्त की तो उन्ही पांडुरंग का नाम जपते-जपते ब्रह्मज्ञानी सदगुरू विसोबा खेचर के श्रीचरणों में पहुँचने की यात्रा कर संत नामदेवजी ने नाम रूपरहित परमात्मा का साक्षात्कार कर लिया | बिजलीघर से तो तार जुड़ा है ही, बस भगवन्नाम की पुकार से अहंकार का बटन दबाया कि प्रकाश-ही-प्रकाश |

Previous Article हे युवान । गुलाम नहीं स्वामी बनो ।
Next Article Kavya Gunjan
Print
3859 Rate this article:
4.5
Please login or register to post comments.