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Kavya Gunjan

Kavya Gunjan

                                                         (काव्यगुंजन)         

है प्रार्थना गुरुदेव के श्री चरणों में ......


है प्रार्थना गुरुदेव से, ये स्वर्ग सम संसार हो |

अति उच्चतम जीवन बने, परमार्थमय व्यवहार हो ||

न हम रहें अपने लिए, हमको सभी का ख्याल हो |

गुरुदेव ये आशीष दें, आत्मप्रेम का विकास हो ||

हम हों पुजारी सत्य के, गुरुदेव के आदेश के |

सच प्रेम के नितनेम के, सतधर्म के सत्कर्म के ||

रहें दूर झूठी राह से, अन्याय से अभिमान से |

सेवा करें हम गुरुजनों की, प्यार से आभार से ||

छोटे न हों हम बुद्धि से, हों विश्वमय से ईशमय |

हों राममय और कृष्णमय, जगदेवमय, जगदीशमय ||

सब इन्द्रियों पर काबू कर, हम वीर हों अति धीर हों |

उज्जवल रहे जीवन सदा, निज धर्म रत हम वीर हों ||

अति शुद्ध हो आचार से, तन-मन हमारा सर्वदा |

अध्यात्म शक्ति से हमें, पल भर नहीं करना जुदा ||

झेलकर गुरु की कृपा को, हम सुखी जीवन जीयें |

इसी जन्म में अमर आत्मा का, दीदार करके हम रहें ||

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