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Importance of Raksha Bandhan

Importance of Raksha Bandhan

शुभ संकल्पों के आदान-प्रदान का दिन : रक्षाबंधन

जैसे भगवान भाव के भूखे हैं , ऐसे ही बहन भी भाई के लिए उत्तम भाव करती है तो भाई के ह्रदय में भी बहन के लिए उत्तम भाव पैदा होता हैं  | तो भाव को अभिव्यक्त करने के लिए साड़ी है तो साड़ी, बर्तन है तो बर्तन या और कोई चीज भाई बहन को देता है | प्रेम में पदार्थ तुच्छ हो जाते हैं , वस्तुएँ छोटी हो जाती हैं और भारतीय संस्कृति का यह दृष्टिकोण रहा है कि प्रेम लेना नहीं जानता, प्रेम प्रेमास्पद को देकर उसके सुख में अपने सुख का एहसास करता है | बहन का भाई के प्रति शुद्ध, पवित्र प्रेम है तो भाई को और कुछ नहीं तो शुभ संकल्पयुक्त सूती धागा बाँधती है | प्रेम इतना संवेदनशील है, इतना अद्भुत, इतना सच्चा है कि भाई के ह्रदय में भी आन्दोलन  पैदा कर देता है और वह भी कुछ--कुछ दिये बिना रहता नहीं है |

आज के दिन भाई-बहन और मित्र परस्पर जो रक्षासूत्र बाँधते हैं, उसमें बड़ा संकल्प होता है कि वर्षभर हम निरोग रहें - तन से, मन से, मति से और  गति से......’धागा तो छोटा-सा होता लेकिन इसका संकल्प बड़ा काम करता है |

रक्षाबंधन दिवस मनाते समय बहन भाई के ललाट पर तिलक करे और भावना करे कि  मेरा भाई त्रिलोचन हो | दो आँखों से इस दुनिया को देखकर दुनिया का पिट्ठू बन के मर जाय , ऐसा नहीं | सुख-दुःख में समता कैसे पायें और ज्योतियों की ज्योति आत्मज्योति को कैसे जगायें ? - ऐसी तीसरी आँख मेरे भैया की खुली होनी चाहिए|

रक्षासूत्र बाँधते समय निम्नलिखित मन्त्र बोलें......

येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबल: |

तेन त्वां अभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल ||

यह धागा टूटे नहीं, आप सुरक्षित रहें ... बहन का भाई के लिए शुभ संकल्प |

जिस पतले रक्षासूत्र ने महाशक्तिशाली असुरराज बलि को बांध दिया, उसीसे में आपको बाँधती हूँ |  यह धागा टूटे नहीं और आप सुरक्षित रहें | यही संकल्प करते हुए बहन भाई को राखी बाँधती है |  जैसे शची (इन्द्र की पत्नी) ने देखा कि १२ साल हो गये, अभी तक युद्ध में निर्णायक अवस्था नहीं आयी है | अत: इन्द्राणी ने बृहस्पति के सुझाव से इन्द्र को रक्षासूत्र “बाँधा कि  “युद्ध में इन्द्र की रक्षा हो” और इन्द्र विजयी हुए | कुंता ने अभिमन्यु को संकल्प्सहित राखी बाँधी | जब तक वह रक्षासूत्र था, अभिमन्यु जूझता ही रहा पहले धागा टूटा, बाद में अभिमन्यु मरा |

अपनी बहन मिले तो ठीक है, नहीं तो किसी भारतीय नारी को अपनी बहन बनाकर उसका शुभ-संकल्प ले सकते हैं | बाल गंगाधर तिलक विदेश में थे | खोजते-खोजते एक हिन्दू महिला के घर पहुँच गये और बोले : “बहन ! कल मैं तुम्हारे यहाँ भोजन करने आऊँगा और तुम रक्षाबंधन का एक धागा मेरे हाथ में बाँध देना | तुम्हारे शुभ संकल्प से मैं वर्षभर चरित्र और सद्विचारो से संपन्न रहूँगा |

रक्षाबंधन आत्मविकास का परिचायक दिवस

रक्षाबंधन आत्मविकास का परिचायक दिवस है | पड़ोस की बहन या भाई की तरफ विकारी नजर गयी लेकिन इसी दिवस का इंतज़ार था, “ले बहन ! आज यह धागा मेरे को बांध” अथवा पड़ोस के भाई को बहन की तरफ से राखी बाँधी जाय | रक्षाबंधन का दिवस चरित्र-निर्माण व चरित्र सुधारनेवाला दिवस है |

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