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शाश्वत मंगलमय दिवाली


ज्योत से ज्योत जगाओ सद्गुरु, मिटे असत् अँधियारा ।

अलख का दीप जगे उर-अंतर, जगमग जीवन सारा ।।

अहं की जब दिवाली हटे, तब ही सच्चा दिवाली है।

लग जाओ गुरु चरणों में, बस घड़ी वो आने वाली है ।।

श्रीगणेश दिवाली का हो , उर में ज्ञान की ज्योति जगे ।

गुरुवर कृपा करो अब ऐसी, जीवन का सब तमस भगे ।।

फोड़ो पटाखें अहं के अब, श्रद्धा के दीप जगायें हम ।

गुरु ज्ञान मिठाई की सुगंध, सेवा से जग महकायें हम।।

अंतरतम दीप प्रकटाकर, सच्ची दिवाली मनायें हम ।

चिंता चरखी, अहं पटाखा, मिथ्या ज्ञान की फुलझड़ियाँ ।

ईर्ष्या के अनार विषयों की, रजस्-तमस् लट्टू-लड़ियाँ।।

असत् अंधेरा दूर न होगा, ये पल में बुझनेवाली ।

ज्ञान की ज्योत जगाओ प्रिय ! शाश्वत मंगलमय दिवाली !!

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