EasyDNNNews

जीवन में सहजता , शांति चाहिए तो इन पाँच को अग्नि में करें स्वाहा

जीवन में सहजता , शांति चाहिए तो इन पाँच को अग्नि में करें स्वाहा

* साधना की एक तरकीब * 

 

आप जो भी साधन-भजन करते हैं उसमें चार चाँद लग जायेंगे | अग्नि जलती है, तो नीचे चौड़ी होती है और ऊपर लौ पतली होती जाती है ...ऐसे ही नाभि के पास लौकिक अग्नि नहीं है, जठराग्नि है लौकिक अग्नि से विलक्षण अग्नि है| आप ध्यान भजन करते समय नाभि में ध्यान करें । ३ से ७ बार ॐकार का उच्चारण करें और फिर भावना करें कि 'त्रिकोणात्मक अग्नि की ज्योत प्रकट हो | इसमें मैं अज्ञान की आहुति देता/देती हूँ। मनुष्य के जो पाँच शत्रु हैं, उनसे कई योनियों में भिड़ते-भिड़ते मनुष्य थक जाता है । उन शत्रुओं से भिड़ने की जरुरत नहीं है, उन शत्रुओं को जैसे पतंगे दीये में चले जाते हैं, तो तबाह हो जाते हैं ऐसे ही ज्ञानाग्नि में उन शत्रुओं की आहुति दे दें । लगता तो है कि ये आहुति बड़ी साधारण साधना है पर ये आपकी जिन्दगी में बड़ी खुशहाली लायेगा । आपके जीवन में निर्विकारिता, सहजता, शान्ति लायेगा | आपके जो पांच शत्रु हैं - अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष, अभिनिवेश- इन पाँच के  कारण आप  अपने आत्म ईश्वर से दूर हुए हैं। इन  पांचों को अग्नि में स्वाहा करें । ध्यान-भजन में जब भी बैठें या (रात्रि को सोते समय भी कर सकते हैं। )

 

ॐ अविद्यां जुहोमि स्वाहा:


(अविद्या को मैं आहुति में डालता हूँ |)

 

* ॐ अस्मितां जुहोमि स्वाहा:*।


(अस्मिता- देह को 'मैं' मानने की गलती ।  हकीकत में हम आत्मा हैं, बेवकूफी से मानते हैं 'मैं' शरीर हूँ । शरीर मरने के बाद भी मैं रहता हूँ )

 

ॐ रागं जुहोमि स्वाहा: *।

 

ॐ द्वेषं जुहोमि स्वाहा: *।

 

ॐ अभिनिवेशं जुहोमि स्वाहा: *।

 

(अभिनिवेश मतलब मृत्यु का भय । हमारी मृत्यु नहीं होती है फिर भी हम मौत से डरते हैं ।)

 

अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष, अभिनिवेश इन पांचों को स्वाहा करके ध्यान में बैठोगे तो बड़ी मदद मिलेगी । बुद्धि में अच्छी प्रेरणा और समता आयेगी।

 

Previous Article ध्यान रखें अपशब्द बन सकते हैं क्रोध का कारण
Next Article अनंत गुना फलदायी मानस-पूजा
Print
2446 Rate this article:
4.2
Please login or register to post comments.