गर्भ में ही बना दें बच्चों को सुसंस्कारी
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गर्भ में ही बना दें बच्चों को सुसंस्कारी

यदि माता-पिता शास्त्र की आज्ञानुसार रहें तो उनके यहाँ दैवी और संस्कारी संतानें उत्पन्न होंगी, श्रीराम और श्रीकृष्ण के समान बालक जन्म लेंगे ।”

वैज्ञानिक भले इस बात को अभी मान रहे हैं परंतु पूज्य बापूजी अपने सत्संगों में पिछले लगभग ५० वर्षों से यह बताते आये हैं । पूज्य संत श्री आशारामजी बापू का ब्रह्मसंकल्प है कि ये ही संस्कारी बालक आगे चलकर भारत को विश्वगुरु के पद पर पहुचायेंगे ।

पूज्य बापूजी कहते हैं : वर्तमान युग में कई माता-पिता ऐसा सोचते हैं कि हमें ऐसे पुत्र क्यों हुए ? उन्हें यह बात समझ लेनी चाहिए कि आजकल स्त्री अथवा पुरुष गर्भाधान के लिए उचित-अनुचित समय-तिथि का ध्यान नहीं रखते हैं । परिणाम में समाज में आसुरी प्रजा बढ़ रही है । बाद में माता-पिता फरियाद करते रहते हैं कि हमारे पुत्र हमारी आज्ञा मे नहीं चलते हैं, उनका चाल-चलन ठीक नहीं है इत्यादि । परंतु यदि माता-पिता शास्त्र की आज्ञानुसार रहें तो उनके यहाँ दैवी और संस्कारी संतानें उत्पन्न होंगी, श्रीराम और श्रीकृष्ण के समान बालक जन्म लेंगे ।”

जो महिलाएँ सगर्भावस्था में टीवी सीरियल व फिल्में देखती हैं, अश्लील गाने आदि सुनती रहती हैं उनके शिशुओं में वे संस्कार गर्भ में ही गहरे पड़ जाते हैं, जिससे बड़े होकर उनका स्वभाव चंचल, कामुक व आपराधिक होने की सम्भावनाएँ बढ़ जाती हैं ।

गर्भावस्था के दौरान सत्संग, सत्शास्त्रों का अध्ययन, देव-दर्शन, संत-दर्शन, भगवद् –उपासना करें और मन को सद्विचारों से ओतप्रोत रखें । भगवन्नाम का अधिकाधिक मासिक जप करें । इससे आपकी संतान दैवी सद्गुणों से युक्त होगी । 




यदि माता-पिता शास्त्र की आज्ञानुसार रहें तो उनके यहाँ दैवी और संस्कारी संतानें उत्पन्न होंगी, श्रीराम और श्रीकृष्ण के समान बालक जन्म लेंगे ।”

वैज्ञानिक भले इस बात को अभी मान रहे हैं परंतु पूज्य बापूजी अपने सत्संगों में पिछले लगभग ५० वर्षों से यह बताते आये हैं । पूज्य संत श्री आशारामजी बापू का ब्रह्मसंकल्प है कि ये ही संस्कारी बालक आगे चलकर भारत को विश्वगुरु के पद पर पहुचायेंगे ।

पूज्य बापूजी कहते हैं : वर्तमान युग में कई माता-पिता ऐसा सोचते हैं कि हमें ऐसे पुत्र क्यों हुए ? उन्हें यह बात समझ लेनी चाहिए कि आजकल स्त्री अथवा पुरुष गर्भाधान के लिए उचित-अनुचित समय-तिथि का ध्यान नहीं रखते हैं । परिणाम में समाज में आसुरी प्रजा बढ़ रही है । बाद में माता-पिता फरियाद करते रहते हैं कि हमारे पुत्र हमारी आज्ञा मे नहीं चलते हैं, उनका चाल-चलन ठीक नहीं है इत्यादि । परंतु यदि माता-पिता शास्त्र की आज्ञानुसार रहें तो उनके यहाँ दैवी और संस्कारी संतानें उत्पन्न होंगी, श्रीराम और श्रीकृष्ण के समान बालक जन्म लेंगे ।”

जो महिलाएँ सगर्भावस्था में टीवी सीरियल व फिल्में देखती हैं, अश्लील गाने आदि सुनती रहती हैं उनके शिशुओं में वे संस्कार गर्भ में ही गहरे पड़ जाते हैं, जिससे बड़े होकर उनका स्वभाव चंचल, कामुक व आपराधिक होने की सम्भावनाएँ बढ़ जाती हैं ।

गर्भावस्था के दौरान सत्संग, सत्शास्त्रों का अध्ययन, देव-दर्शन, संत-दर्शन, भगवद् –उपासना करें और मन को सद्विचारों से ओतप्रेत रखें । भगवन्नाम का अधिकाधिक मासिक जप करें । इससे आपकी संतान दैवी सद्गुणों से युक्त होगी । 


यदि माता-पिता शास्त्र की आज्ञानुसार रहें तो उनके यहाँ दैवी और संस्कारी संतानें उत्पन्न होंगी, श्रीराम और श्रीकृष्ण के समान बालक जन्म लेंगे ।”

वैज्ञानिक भले इस बात को अभी मान रहे हैं परंतु पूज्य बापूजी अपने सत्संगों में पिछले लगभग ५० वर्षों से यह बताते आये हैं । पूज्य संत श्री आशारामजी बापू का ब्रह्मसंकल्प है कि ये ही संस्कारी बालक आगे चलकर भारत को विश्वगुरु के पद पर पहुचायेंगे ।

पूज्य बापूजी कहते हैं : वर्तमान युग में कई माता-पिता ऐसा सोचते हैं कि हमें ऐसे पुत्र क्यों हुए ? उन्हें यह बात समझ लेनी चाहिए कि आजकल स्त्री अथवा पुरुष गर्भाधान के लिए उचित-अनुचित समय-तिथि का ध्यान नहीं रखते हैं । परिणाम में समाज में आसुरी प्रजा बढ़ रही है । बाद में माता-पिता फरियाद करते रहते हैं कि हमारे पुत्र हमारी आज्ञा मे नहीं चलते हैं, उनका चाल-चलन ठीक नहीं है इत्यादि । परंतु यदि माता-पिता शास्त्र की आज्ञानुसार रहें तो उनके यहाँ दैवी और संस्कारी संतानें उत्पन्न होंगी, श्रीराम और श्रीकृष्ण के समान बालक जन्म लेंगे ।”

जो महिलाएँ सगर्भावस्था में टीवी सीरियल व फिल्में देखती हैं, अश्लील गाने आदि सुनती रहती हैं उनके शिशुओं में वे संस्कार गर्भ में ही गहरे पड़ जाते हैं, जिससे बड़े होकर उनका स्वभाव चंचल, कामुक व आपराधिक होने की सम्भावनाएँ बढ़ जाती हैं ।

गर्भावस्था के दौरान सत्संग, सत्शास्त्रों का अध्ययन, देव-दर्शन, संत-दर्शन, भगवद् –उपासना करें और मन को सद्विचारों से ओतप्रेत रखें । भगवन्नाम का अधिकाधिक मासिक जप करें । इससे आपकी संतान दैवी सद्गुणों से युक्त होगी । 


यदि माता-पिता शास्त्र की आज्ञानुसार रहें तो उनके यहाँ दैवी और संस्कारी संतानें उत्पन्न होंगी, श्रीराम और श्रीकृष्ण के समान बालक जन्म लेंगे ।”

वैज्ञानिक भले इस बात को अभी मान रहे हैं परंतु पूज्य बापूजी अपने सत्संगों में पिछले लगभग ५० वर्षों से यह बताते आये हैं । पूज्य संत श्री आशारामजी बापू का ब्रह्मसंकल्प है कि ये ही संस्कारी बालक आगे चलकर भारत को विश्वगुरु के पद पर पहुचायेंगे ।

पूज्य बापूजी कहते हैं : वर्तमान युग में कई माता-पिता ऐसा सोचते हैं कि हमें ऐसे पुत्र क्यों हुए ? उन्हें यह बात समझ लेनी चाहिए कि आजकल स्त्री अथवा पुरुष गर्भाधान के लिए उचित-अनुचित समय-तिथि का ध्यान नहीं रखते हैं । परिणाम में समाज में आसुरी प्रजा बढ़ रही है । बाद में माता-पिता फरियाद करते रहते हैं कि हमारे पुत्र हमारी आज्ञा मे नहीं चलते हैं, उनका चाल-चलन ठीक नहीं है इत्यादि । परंतु यदि माता-पिता शास्त्र की आज्ञानुसार रहें तो उनके यहाँ दैवी और संस्कारी संतानें उत्पन्न होंगी, श्रीराम और श्रीकृष्ण के समान बालक जन्म लेंगे ।”

जो महिलाएँ सगर्भावस्था में टीवी सीरियल व फिल्में देखती हैं, अश्लील गाने आदि सुनती रहती हैं उनके शिशुओं में वे संस्कार गर्भ में ही गहरे पड़ जाते हैं, जिससे बड़े होकर उनका स्वभाव चंचल, कामुक व आपराधिक होने की सम्भावनाएँ बढ़ जाती हैं ।

गर्भावस्था के दौरान सत्संग, सत्शास्त्रों का अध्ययन, देव-दर्शन, संत-दर्शन, भगवद् –उपासना करें और मन को सद्विचारों से ओतप्रेत रखें । भगवन्नाम का अधिकाधिक मासिक जप करें । इससे आपकी संतान दैवी सद्गुणों से युक्त होगी । 


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