आध्यात्मिक जागरण अभियान

यन्नामकीर्तनं भक्त्या विलापनमनुत्तमम्।
मैत्रेयाशेषपापानां धातूमिव पावकः।।

'जैसे अग्नि सुवर्ण आदि धातुओं के मल को नष्ट कर देती है, ऐसे ही भक्ति से किया गया भगवान का कीर्तन सब पापों के नाश का अत्युत्तम साधन है।'

पाश्चात्य वैज्ञानिक डॉ. डायमंड ने अपने प्रयोगों से सिद्ध किया है कि रॉक, पॉप संगीत सुनने वाले और डिस्को डास में सम्मिलित होने वाले, दोनों की जीवनशक्ति क्षीण होती है, जबकि भारतीय शास्त्रीय संगीत और हरिनाम कीर्तनसे जीवनशक्ति का शीघ्र व महत्तर विकास होता है। हरिनाम संकीर्तन हमारे ऋषि-मुनियों एवं संतों ने हमें आनुवंशिक परंपराओं के रुप में प्रदान किया है और यह भोग-मोक्ष दोनों का देने वाला है।

हमारे शास्त्रों की पुकार हरि-कीर्तन के बारे में इसीलिए है ताकि सामान्य-से-सामान्य नर-नारी, आबाल-वृद्ध, सब ताली बजाते हुए कीर्तन करें, भगवद्भाव में नृत्य करें, उन्हें एक्यूप्रेशर चिकित्सा का अनायास ही लाभ मिले, उनके प्राण तालबद्ध बनें (प्राण तालबद्ध बनने से, प्राणायाम से आयुष्य बढ़ता है), मन के विकार, दुःख, शोक आदि का नाश हो और हरिरसरूपी अमृत पियें।

इसीलिए तुलसीदासजी ने कहा हैः

रामनाम की औषधि खरी नियत से खाय।
अंगरोग व्यापे नहीं महारोग मिट जाय।।

ऐसे अद्भुत भगवन्नाम व मंत्रजप की महिमा से जनसाधारण को लाभान्वित करने, नाम-संकीर्तन द्वारा सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न कर वैचारिक प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से भगवन्नाम-जप, भजन-कीर्तन व श्रीमद् भगवद्गीता पाठ आदि के माध्यम से लोगों के भीतर की आध्यात्मिक शक्ति को जगाना ही इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है ।

Bhajan sandhya on Budha Purnima in Sahajanand, Gujarat
Bhajan sandhya on Budha Purnima in Sahajanand, Gujarat
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